नमस्ते मेरे प्यारे फिटनेस प्रेमियों! आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद को फिट रखना एक चुनौती जैसा लगता है, है ना? कभी जिम जाने का समय नहीं मिलता, तो कभी बंद जगह पर एक्सरसाइज करने का मन ही नहीं करता। मेरे साथ भी अक्सर ऐसा होता है, खासकर जब मौसम इतना प्यारा हो और बाहर निकलने का दिल करे। मैंने खुद महसूस किया है कि जब आप ताजी हवा में वर्कआउट करते हैं, तो एनर्जी दोगुनी हो जाती है!
इसीलिए, मैंने सोचा क्यों न कुछ ऐसा ढूंढा जाए जिससे फिटनेस और आज़ादी, दोनों एक साथ मिल सकें? और सच कहूँ, मुझे जो मिला उसने मेरी तो जैसे ज़िंदगी ही बदल दी!
ये छोटे-छोटे, कमाल के उपकरण आपको कहीं भी, कभी भी अपनी फिटनेस रूटीन फॉलो करने की आज़ादी देते हैं। अब कोई बहाना नहीं चलेगा, चाहे आप पार्क में हों, ट्रैवल कर रहे हों या बस अपने घर के आँगन में हों।तो चलिए, बिना किसी देरी के, इस लेख में हम 5 सबसे बेहतरीन आउटडोर पोर्टेबल एक्सरसाइज उपकरणों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जो आपकी फिटनेस यात्रा को और भी मज़ेदार बना देंगे।
रेजिस्टेंस बैंड्स: आपकी जेब में पूरा जिम!

अरे हाँ, रेजिस्टेंस बैंड्स! ये मेरी फिटनेस जर्नी के ऐसे सच्चे साथी रहे हैं, जिनके बिना अब मैं खुद को अधूरा महसूस करती हूँ। पहली बार जब मैंने इन्हें देखा था, तो सोचा था कि ये पतली-सी रबर की पट्टियाँ भला क्या कमाल करेंगी? लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि ये कमाल से भी बढ़कर हैं। सच कहूँ तो, जब भी मैं कहीं घूमने जाती हूँ या घर से बाहर होती हूँ, तो सबसे पहले इन्हें ही अपने बैग में रखती हूँ। ये इतने हल्के और छोटे होते हैं कि कहीं भी फिट हो जाते हैं, चाहे मेरा छोटा-सा हैंडबैग हो या बैकपैक। मुझे याद है, एक बार मैं पहाड़ों में ट्रेकिंग पर गई थी और शाम को कैंप में सिर्फ इन बैंड्स की मदद से मैंने अपनी मसल्स को रिलैक्स किया और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी कर ली। यकीन मानिए, सुबह उठकर मैं बिल्कुल फ्रेश महसूस कर रही थी। इनका इस्तेमाल सिर्फ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लिए ही नहीं, बल्कि वार्म-अप और स्ट्रेचिंग के लिए भी किया जा सकता है, जिससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है। ये मांसपेशियों को इस तरह से टारगेट करते हैं, जैसे भारी-भरकम मशीनें भी न कर पाएं।
हल्के फुल्के, पर ताकतवर!
इनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी पोर्टेबिलिटी है। जब भी मैं दोस्तों के साथ पार्क में वर्कआउट करने जाती हूँ, तो हर कोई हैरान होता है कि मैं इतने सारे इक्विपमेंट्स एक छोटे से बैग में कैसे ले आती हूँ। दरअसल, ये बैंड्स अलग-अलग रेजिस्टेंस लेवल्स में आते हैं, हल्के से लेकर भारी तक, तो आप अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सकते हैं। मैंने खुद शुरुआत हल्के बैंड्स से की थी और धीरे-धीरे भारी बैंड्स पर शिफ्ट हुई। इसका मतलब है कि आप चाहे बिगिनर हों या एडवांस, ये हर किसी के लिए परफेक्ट हैं। ये मुझे न सिर्फ ताकत देते हैं, बल्कि मेरे जोड़ों पर भी कोई अतिरिक्त दबाव नहीं डालते, जो मेरे लिए बहुत ज़रूरी है।
अनगिनत व्यायामों का साथी
रेजिस्टेंस बैंड्स की सबसे अच्छी बात यह है कि इनसे आप लगभग हर मांसपेशी का व्यायाम कर सकते हैं। स्क्वैट्स, लंजेस, बाइसेप कर्ल्स, ट्राइसेप्स एक्सटेंशन्स, शोल्डर प्रेस… क्या नहीं कर सकते! मैंने तो इनसे कई क्रिएटिव वर्कआउट भी ट्राई किए हैं, जो मुझे किसी जिम में कभी नहीं मिले। मुझे याद है, एक बार मैंने इनसे पुल-अप्स में भी मदद ली थी, जब मैं शुरुआत कर रही थी। ये सचमुच एक मल्टीपर्पस टूल हैं। ये आपको अपनी कोर मसल्स को मजबूत करने में भी मदद करते हैं, जिससे मेरा पोस्चर बहुत बेहतर हुआ है।
जंप रोप: बचपन का खेल, अब फिटनेस का राज!
याद है बचपन में रस्सी कूदना कितना मजेदार लगता था? मुझे तो लगता था ये सिर्फ खेल है, लेकिन अब मुझे एहसास होता है कि ये मेरी फिटनेस का सबसे आसान और मजेदार राज है! जब जिम जाने का मन नहीं होता, या बाहर कहीं अच्छी जगह मिल जाती है, तो मेरी जंप रोप मेरा सबसे भरोसेमंद साथी बन जाती है। आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन सिर्फ 10-15 मिनट की जंपिंग भी पूरे शरीर को जगा देती है। मैं इसे अपने ट्रैवल बैग में हमेशा रखती हूँ, क्योंकि यह इतनी कम जगह लेती है कि पता भी नहीं चलता। एयरपोर्ट पर फ्लाइट का इंतजार करते हुए भी मैंने कई बार इसका इस्तेमाल किया है (हाँ, लोग मुझे देखते हैं, पर मुझे अपनी फिटनेस से प्यार है!)। आजकल तो स्मार्ट जंप रोप्स भी आ गई हैं, जो आपके जंप काउंट और कैलोरी भी बताती हैं। मैंने भी एक ट्राई की थी, और उसने तो मेरे वर्कआउट को और भी मजेदार बना दिया।
दिल को रखे दुरुस्त और कैलोरी जलाए धड़ल्ले से
अगर आप जल्दी से कैलोरी बर्न करना चाहते हैं और अपने दिल को मजबूत रखना चाहते हैं, तो जंप रोप से बेहतर कुछ नहीं। यह एक शानदार कार्डियो वर्कआउट है जो आपके पूरे शरीर को सक्रिय करता है। मैंने खुद महसूस किया है कि नियमित रूप से रस्सी कूदने से मेरी स्टैमिना में कितनी बढ़ोतरी हुई है। यह आपके पैरों, कोर और कंधों को एक साथ काम करने पर मजबूर करता है। मुझे यह भी पसंद है कि यह आपको बचपन की यादें दिलाकर तनाव से दूर रखता है।
कहीं भी, कभी भी – बस एक रस्सी का कमाल
इसकी पोर्टेबिलिटी इसे एक अद्भुत उपकरण बनाती है। चाहे आप किसी पार्क में हों, अपने घर के आंगन में, या फिर किसी छोटे होटल के कमरे में, आपको बस थोड़ी सी खुली जगह चाहिए। मैंने तो एक बार अपने घर की छत पर भी इसका पूरा फायदा उठाया था। यह सचमुच कहीं भी वर्कआउट करने की आजादी देती है। यह इतनी सस्ती भी होती है कि हर कोई इसे आसानी से खरीद सकता है और अपनी फिटनेस यात्रा शुरू कर सकता है।
सस्पेंशन ट्रेनर्स: शरीर के वजन से बनी अद्भुत ताकत!
सस्पेंशन ट्रेनर्स, जैसे कि TRX, ने मेरी फिटनेस दुनिया को एक नया आयाम दिया है। जब मैंने पहली बार इनके बारे में सुना था, तो मुझे लगा था कि ये सिर्फ जिम के लिए हैं। लेकिन जब मैंने देखा कि इन्हें कितनी आसानी से कहीं भी, किसी भी मजबूत एंकर पॉइंट से अटैच किया जा सकता है – चाहे वह पेड़ की डाल हो, पार्क का झूला, या फिर घर का कोई मजबूत दरवाजा – तो मैं हैरान रह गई। मेरा अनुभव कहता है कि ये आपकी बॉडीवेट ट्रेनिंग को बिल्कुल अलग स्तर पर ले जाते हैं। मैंने खुद इन्हें पार्क में पेड़ों से बांधकर कई बार वर्कआउट किया है, और ताजी हवा में वर्कआउट करने का मजा ही कुछ और है! ये सिर्फ ताकत ही नहीं बढ़ाते, बल्कि आपके संतुलन और कोर को भी मजबूत करते हैं, जिसका फायदा मुझे अपने रोजमर्रा के कामों में भी दिखता है।
पूरा शरीर एक साथ, गजब का संतुलन
इनसे आप स्क्वैट्स, लंजेस, पुश-अप्स, रो और कई कोर एक्सरसाइज कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि ये आपकी कोर को हर एक्सरसाइज में शामिल करते हैं, जिससे मेरा पेट हमेशा टाइट महसूस होता है। जब आप अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी मसल्स ज्यादा फंक्शनल तरीके से काम करती हैं। मुझे याद है, शुरुआत में संतुलन बनाना थोड़ा मुश्किल था, लेकिन कुछ ही दिनों में मैं इसमें माहिर हो गई। यह सचमुच आपको अपने शरीर के साथ एक मजबूत कनेक्शन बनाने में मदद करता है।
इंस्टॉलेशन का झंझट खत्म, वर्कआउट की शुरुआत
इनकी सबसे बड़ी सुविधा यह है कि इन्हें सेट अप करना बहुत आसान है। इसमें एक डोर एंकर भी आता है, तो आप घर के अंदर भी आसानी से वर्कआउट कर सकते हैं। मैंने कई बार ऐसा किया है जब बाहर मौसम खराब होता है। बस कुछ ही मिनटों में ये तैयार हो जाते हैं, और आपका जिम कहीं भी आपके साथ होता है।
पोर्टेबल पुल-अप बार: ऊपर उठें, मजबूत बनें!

पुल-अप्स को हमेशा से ही सबसे मुश्किल एक्सरसाइज में से एक माना जाता है, है ना? लेकिन जब से मैंने पोर्टेबल पुल-अप बार का इस्तेमाल करना शुरू किया है, तब से मुझे लगा कि यह इतना भी मुश्किल नहीं है। शुरुआत में मैं सिर्फ हैंग कर पाती थी, लेकिन अब मैं कई रिप्स लगा लेती हूँ। यह मेरी ऊपरी शरीर की ताकत को बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार रहा है। मैं हमेशा सोचती थी कि पुल-अप्स सिर्फ जिम में ही किए जा सकते हैं, लेकिन ये पोर्टेबल बार्स ने मेरी सोच बदल दी। अब मैं इन्हें अपने घर के दरवाजे पर या कभी-कभी पार्क में लगे मजबूत ढांचे पर भी लगा लेती हूँ, अगर कोई ऐसा मिल जाए। यह एक ऐसा निवेश है जो आपको सिर्फ फिजिकल ही नहीं, बल्कि मेंटली भी मजबूत बनाता है, क्योंकि हर बार जब आप एक और पुल-अप करते हैं, तो आत्मविश्वास बढ़ता है!
ऊपरी शरीर की ताकत का राज़
पुल-अप्स और चिन-अप्स आपके पीठ, बाइसेप्स, कंधों और कोर के लिए बेहतरीन होते हैं। मुझे याद है जब मैंने पहली बार इसे अपने दरवाजे पर लगाया था, तो थोड़ा डर लग रहा था कि कहीं गिर न जाऊँ। लेकिन आजकल के पोर्टेबल पुल-अप बार्स काफी मजबूत और सुरक्षित होते हैं। इनसे आप सिर्फ पुल-अप्स ही नहीं, बल्कि फर्श पर रखकर पुश-अप्स और डिप्स भी कर सकते हैं। यह एक मल्टीफंक्शनल उपकरण है जो आपके ऊपरी शरीर की सभी प्रमुख मांसपेशियों को टारगेट करता है।
आसान सेट-अप, जबरदस्त परिणाम
इनकी सबसे बड़ी खूबी इनका आसान इंस्टॉलेशन है। ज्यादातर बार्स को बिना किसी स्क्रू या ड्रिलिंग के दरवाजे के फ्रेम में लगाया जा सकता है। बस कुछ ही सेकंड में आपका पर्सनल पुल-अप स्टेशन तैयार! और जब वर्कआउट खत्म हो जाए, तो इसे आसानी से हटाया भी जा सकता है। मुझे लगता है कि यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनके पास घर में ज्यादा जगह नहीं है, या जो बाहर खुले में वर्कआउट करना पसंद करते हैं।
आउटडोर योगा मैट: प्रकृति की गोद में शांति और शक्ति!
मैंने हमेशा योगा को प्रकृति से जोड़ने की कोशिश की है। मुझे याद है, जब मैं पहली बार एक आउटडोर योगा सेशन में शामिल हुई थी, तो मुझे घास और धूल पर योगा करने में थोड़ी दिक्कत हुई थी। तभी मुझे एहसास हुआ कि एक अच्छी आउटडोर योगा मैट कितनी जरूरी है। ये मैट सिर्फ योगा के लिए ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह के ग्राउंड वर्कआउट, जैसे प्लैंक्स, पुश-अप्स, या स्ट्रेचिंग के लिए भी बहुत काम आती हैं। मुझे पर्सनली ऐसी मैट पसंद हैं जो थोड़ी मोटी हों और नॉन-स्लिप हों, ताकि मैं खुले आसमान के नीचे बिना किसी चिंता के अपनी प्रैक्टिस कर सकूँ। यह आपको प्रकृति के साथ एक गहरा जुड़ाव महसूस कराती है, जो जिम की चार दीवारों में शायद ही महसूस हो। जब मैं सुबह-सुबह पार्क में अपनी मैट बिछाकर सूर्य नमस्कार करती हूँ, तो उस शांति और ताजी हवा का अनुभव अतुलनीय होता है।
स्वच्छ और आरामदायक आधार
आउटडोर मैट आपको जमीन की गंदगी, नमी और छोटे पत्थरों से बचाती है। इससे आप आराम से और स्वच्छ वातावरण में व्यायाम कर सकते हैं। मेरी मैट तो ऐसी है कि उसे आसानी से साफ भी किया जा सकता है, जो आउटडोर इस्तेमाल के लिए बहुत जरूरी है। मुझे यह भी अच्छा लगता है कि कुछ मैट्स थोड़ी एक्स्ट्रा कुशनिंग के साथ आती हैं, जो मेरे जोड़ों के लिए आरामदायक रहती हैं, खासकर जब मैं हार्ड सरफेस पर वर्कआउट करती हूँ।
स्थिरता और सुरक्षा का वादा
एक अच्छी आउटडोर योगा मैट नॉन-स्लिप होनी चाहिए, खासकर जब आप पसीना बहा रहे हों या जमीन थोड़ी असमान हो। इससे गिरने या चोट लगने का खतरा कम हो जाता है। मुझे एक बार ऐसी मैट पर वर्कआउट करने का बुरा अनुभव हुआ था जो फिसल रही थी, उसके बाद से मैं हमेशा अच्छी ग्रिप वाली मैट ही चुनती हूँ। ये मैट धूप और नमी का सामना करने के लिए भी बनी होती हैं, ताकि लंबे समय तक चल सकें।
हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपकी आउटडोर फिटनेस यात्रा को और भी रोमांचक और आसान बनाएगी। इन पोर्टेबल उपकरणों के साथ, आपके पास अब कोई बहाना नहीं होगा और आप कहीं भी, कभी भी अपनी फिटनेस को प्राथमिकता दे पाएंगे। तो अब देर किस बात की, अपने पसंदीदा उपकरण को चुनें और प्रकृति की गोद में पसीना बहाने के लिए तैयार हो जाएँ!
| उपकरण | मुख्य लाभ | उपयोग में आसानी | पोर्टेबिलिटी |
|---|---|---|---|
| रेजिस्टेंस बैंड्स | स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, टोनिंग, स्ट्रेचिंग, जोड़-अनुकूल | बहुत आसान (शुरुआती के लिए भी) | अत्यधिक पोर्टेबल (जेब में फिट) |
| जंप रोप | कार्डियो, कैलोरी बर्न, स्टैमिना बढ़ाना | आसान (थोड़ी प्रैक्टिस चाहिए) | अत्यधिक पोर्टेबल (छोटे बैग में फिट) |
| सस्पेंशन ट्रेनर्स | पूरे शरीर की ताकत, संतुलन, कोर स्ट्रेंथ | मध्यम (सही एंकरिंग समझना) | उच्च पोर्टेबल (छोटे बैग में फिट) |
| पोर्टेबल पुल-अप बार | ऊपरी शरीर और कोर की ताकत | आसान (दरवाजे पर लगाना) | मध्यम (आकार पर निर्भर करता है) |
| आउटडोर योगा मैट | स्वच्छ और आरामदायक वर्कआउट सतह | बहुत आसान | उच्च पोर्टेबल (रोल या फोल्ड करना) |
बात खत्म करते हुए
तो दोस्तों, देखा आपने कि कैसे ये छोटे-छोटे पोर्टेबल फिटनेस गैजेट्स हमारी सेहत की यात्रा को कितना मजेदार और आसान बना सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरे अनुभवों और इन उपकरणों की खूबियों ने आपको भी अपनी फिटनेस जर्नी शुरू करने या उसे अगले स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया होगा। याद रखिए, स्वस्थ शरीर और मन के लिए अब आपको किसी महंगी जिम मेंबरशिप या भारी-भरकम मशीनों की जरूरत नहीं है। बस अपनी पसंद का एक उपकरण चुनें, थोड़ी खुली हवा और प्रकृति का साथ पाएँ, और देखिए कैसे आपकी ऊर्जा का स्तर एक नई ऊँचाई छूता है। यह सिर्फ व्यायाम नहीं, यह खुद को थोड़ा और प्यार देने का एक तरीका है। यह एक ऐसा कदम है जो आपको न सिर्फ फिट रखेगा, बल्कि आपके दिन को भी सकारात्मक ऊर्जा से भर देगा।
कुछ काम की बातें जो आपको जाननी चाहिए
1. अपना वर्कआउट शुरू करने से पहले हमेशा अच्छी तरह से वार्म-अप करें, खासकर जब आप बाहर हों। ठंडी मांसपेशियों को सीधे व्यायाम में झोंकना चोट का कारण बन सकता है। हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग और कार्डियो से शुरुआत करें ताकि आपका शरीर तैयार हो सके और चोट लगने का जोखिम कम हो। वार्म-अप ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाता है।
2. सही पोस्चर और फॉर्म पर ध्यान दें। भले ही ये उपकरण हल्के लगें, गलत तरीके से व्यायाम करने से मांसपेशियों में खिंचाव या चोट लग सकती है। सही फॉर्म से मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। अगर आप किसी नई एक्सरसाइज को लेकर अनिश्चित हैं, तो पहले उसके बारे में जानकारी लें या किसी जानकार से सलाह लें।
3. अपने शरीर की सुनें। यदि आपको दर्द या असहजता महसूस होती है, तो रुक जाएँ। खुद को बहुत ज्यादा धकेलना कभी भी अच्छा नहीं होता। धीरे-धीरे प्रगति करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही आगे बढ़ें। इससे आप स्वस्थ रहेंगे और चोट लगने की संभावना भी कम होगी।
4. पानी पीना न भूलें! खासकर जब आप बाहर वर्कआउट कर रहे हों और पसीना बहा रहे हों, तो पर्याप्त हाइड्रेशन बहुत जरूरी है। अपने साथ हमेशा पानी की बोतल रखें, क्योंकि डिहाइड्रेशन से मांसपेशियों में थकान और चक्कर आ सकते हैं।
5. अपने वर्कआउट में विविधता बनाए रखें। केवल एक ही उपकरण पर निर्भर न रहें। अलग-अलग बैंड्स, रोप्स या ट्रेनर्स का इस्तेमाल करके अपने वर्कआउट को मजेदार और चुनौतीपूर्ण बनाए रखें, ताकि आपका शरीर अलग-अलग मांसपेशियों पर काम कर सके और बोरियत भी न हो। यह मांसपेशियों को लचीला बनाए रखने में मदद करता है।
मुख्य बातें सारांश में
संक्षेप में कहें तो, पोर्टेबल फिटनेस उपकरण आपके फिटनेस लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक अविश्वसनीय रूप से प्रभावी, सुविधाजनक और मजेदार तरीका हैं। ये आपको किसी भी समय, कहीं भी वर्कआउट करने की आजादी देते हैं, चाहे आप घर पर हों, यात्रा कर रहे हों, या प्रकृति का आनंद ले रहे हों। रेजिस्टेंस बैंड्स से लेकर जंप रोप, सस्पेंशन ट्रेनर्स, पोर्टेबल पुल-अप बार और आउटडोर योगा मैट तक, हर उपकरण अपने आप में एक मिनी-जिम है, जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेगा। इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप न केवल अपनी शारीरिक शक्ति और धीरज बढ़ा सकते हैं, बल्कि मानसिक शांति और नई ऊर्जा का भी अनुभव कर सकते हैं। यह आपकी सेहत के प्रति एक छोटा सा निवेश है, जिसके बड़े फायदे आपको लंबी अवधि में मिलेंगे। नियमित व्यायाम हृदय और फेफड़ों को मजबूत बनाता है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और डिप्रेशन का जोखिम कम करता है। तो अब बहाने छोड़ो, अपना पसंदीदा उपकरण चुनो और अपनी फिटनेस की नई और रोमांचक यात्रा शुरू करो, दोस्तो! मुझे यकीन है कि आपको इसमें उतना ही मजा आएगा जितना मुझे आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: इन पोर्टेबल उपकरणों का इस्तेमाल करके मैं अपनी फिटनेस जर्नी कैसे शुरू कर सकता हूँ, खासकर अगर मैं बिल्कुल नया हूँ?
उ: अरे मेरे दोस्त, यह सवाल तो हर नए फिटनेस उत्साही के मन में आता है! मैंने खुद भी जब शुरुआत की थी, तो यही सोचती थी कि पता नहीं कैसे होगा। लेकिन यकीन मानो, इन पोर्टेबल उपकरणों के साथ फिटनेस शुरू करना बहुत आसान और मज़ेदार है। सबसे पहले, खुद पर ज़्यादा दबाव मत डालो। छोटे-छोटे कदम उठाओ। जैसे, एक रेजिस्टेंस बैंड लो और उससे हल्के स्ट्रेच या स्क्वैट्स से शुरू करो। शुरू में 15-20 मिनट का सेशन भी काफी है। मैंने देखा है कि जब आप पार्क जैसी खुली जगह पर एक्सरसाइज करते हैं, तो आसपास की ताज़ी हवा और हरियाली आपको एक अलग ही मोटिवेशन देती है। आप अपनी बॉडी को सुनो, उसे धीरे-धीरे एडजस्ट होने दो। हर रोज़ कुछ नया सीखो, चाहे वो नई एक्सरसाइज हो या अपने पसंदीदा गाने सुनते हुए थोड़ी देर स्किपिंग करना। धीरे-धीरे आप देखोगे कि न केवल आपकी ताकत बढ़ रही है, बल्कि आपका मूड भी कितना अच्छा रहने लगा है!
ये पोर्टेबल उपकरण बस आपको एक धक्का देते हैं, बाकी का रास्ता आप खुद तय करते हो।
प्र: इतने सारे विकल्प होने पर मैं अपने लिए सही आउटडोर पोर्टेबल उपकरण कैसे चुनूँ?
उ: हाँ, मैं समझ सकती हूँ! बाज़ार में इतने सारे विकल्प हैं कि सही चीज़ चुनना कभी-कभी मुश्किल लगता है। मैंने खुद भी शुरू में बहुत रिसर्च की थी और कुछ चीज़ें तो ऐसी भी थीं जो मैंने लीं, पर इस्तेमाल नहीं कर पाई। मेरी सलाह यह है कि सबसे पहले अपनी ज़रूरतों और फिटनेस लक्ष्यों को समझो। आप क्या करना चाहते हो?
क्या आप अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हो (रेजिस्टेंस बैंड, डंबल्स), अपनी स्टेमिना बढ़ाना चाहते हो (स्किपिंग रोप, पोर्टेबल साइकल), या अपनी फ्लेक्सिबिलिटी पर काम करना चाहते हो (योगा मैट, स्ट्रेचिंग बैंड)?
फिर, यह भी देखो कि आप कितना बजट खर्च कर सकते हो। कुछ उपकरण बहुत सस्ते होते हैं, जैसे स्किपिंग रोप या रेजिस्टेंस बैंड, और कुछ थोड़े महंगे। मेरे हिसाब से, सबसे बढ़िया तरीका है उन चीज़ों से शुरू करना जो मल्टीपर्पस हों। जैसे, एक अच्छा रेजिस्टेंस बैंड आपको अलग-अलग एक्सरसाइज़ करने की सुविधा देता है। और हाँ, पोर्टेबिलिटी यानी उन्हें कहीं भी ले जाने में कितनी आसानी है, यह भी देखना मत भूलना। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जो चीज़ आसानी से बैग में आ जाए, वो ज़्यादा इस्तेमाल होती है!
प्र: क्या इन छोटे उपकरणों से भी एक पूरी बॉडी वर्कआउट संभव है, और क्या ये वाकई असरदार होते हैं?
उ: यह सवाल तो मुझे अक्सर पूछा जाता है, और इसका मेरा जवाब हमेशा “हाँ!” होता है। सच कहूँ तो, जब मैंने पहली बार एक रेजिस्टेंस बैंड और स्किपिंग रोप से वर्कआउट शुरू किया था, तो मुझे भी थोड़ा शक था। लेकिन दोस्तों, मैंने खुद महसूस किया है कि ये छोटे उपकरण कमाल कर सकते हैं!
ये इतने वर्सेटाइल होते हैं कि आप इनसे अपनी पूरी बॉडी को ट्रेन कर सकते हैं। रेजिस्टेंस बैंड से आप अपनी बाहों, पैरों, पेट और पीठ की एक्सरसाइज़ कर सकते हैं। स्किपिंग रोप कार्डियो के लिए बेहतरीन है और आपकी सहनशक्ति को बढ़ाती है। आप इन उपकरणों को अलग-अलग एक्सरसाइज़ में मिलाकर एक सर्किट ट्रेनिंग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, स्किपिंग के कुछ मिनट, फिर रेजिस्टेंस बैंड के साथ स्क्वैट्स, उसके बाद पुश-अप्स (जो आप एक पोर्टेबल पुश-अप बार की मदद से भी कर सकते हैं)। महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी एक्सरसाइज़ को कितनी तीव्रता से और कितनी लगातार कर रहे हैं। मैंने देखा है कि कंसिस्टेंसी और सही फॉर्म के साथ, ये उपकरण जिम जितने ही असरदार होते हैं, और सबसे अच्छी बात ये है कि आप इन्हें कभी भी, कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हो। मुझे तो अब जिम जाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती!






